MPI क्या होता है? मैग्नेटिक पार्टिकल इंस्पेक्शन – रियल इंडस्ट्री एक्सपीरियंस के साथ
परिचय
देखो, ऑटोमोटिव और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में ऐसे बहुत से पार्ट्स होते हैं जिनमें अगर एक छोटी सी भी क्रैक रह गई, तो आगे चलकर वो बड़ी फेलियर बन सकती है। मैं बात कर रहा हूँ गियर, शाफ्ट और फोर्ज्ड कंपोनेंट्स की। इसलिए इंडस्ट्रीज एनडीटी मेथड्स यूज़ करती हैं – एनडीटी मतलब नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग।
और इन्हीं मेथड्स में एक है एमपीआई – मैग्नेटिक पार्टिकल इंस्पेक्शन।
अब ये सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं है। मुझे असल में एमपीआई इंस्पेक्शन काम करते हुए टाइम मिला है। मेरी कंपनी में लगभग 1200 लोग थे, लेकिन प्रैक्टिकल एमपीआई अंडरस्टैंडिंग सिर्फ कुछ लोगों को थी। मैं गियर और शाफ्ट क्रैक इंस्पेक्शन करता था – और ये एक्सपीरियंस मेरे करियर का सबसे अलग रहा।
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चलो पहले ये समझते हैं – एमपीआई है क्या?
एमपीआई का फुल फॉर्म मैग्नेटिक पार्टिकल इंस्पेक्शन है।
सिंपल शब्दों में समझो – बिना पार्ट को तोड़े उसमें क्रैक ढूंढने का तरीका है एमपीआई। और हाँ, पार्ट को कोई नुकसान नहीं होता।
ऑटो इंडस्ट्री में कहाँ यूज़ होता है?
मैं यूज़ कर चुका हूँ इनमें:
· गियर इंस्पेक्शन
· शाफ्ट इंस्पेक्शन
· फोर्ज्ड पार्ट्स
· वेल्डेड कंपोनेंट्स
· जो भी क्रिटिकल सेफ्टी पार्ट्स होते हैं
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प्रोसेस कैसे शुरू होती है? (मैंने जो किया है)
सबसे पहला काम – सॉल्यूशन तैयार करना।
मशीन के टैंक में करीब 25 लीटर केरोसिन ऑयल डालते हैं। उसके बाद हर लीटर में लगभग 2 ग्राम मैग्नाफ्लक्स पाउडर मिलाते हैं। ये रेशियो मैंने प्रैक्टिकली फॉलो किया है।
पाउडर डालने के बाद अच्छी तरह मिक्स करो। फिर उसे आधे घंटे के लिए रहने दो – ताकि पाउडर ऑयल में प्रॉपरली सेटल हो जाए।
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कंसंट्रेशन चेक – क्यू जरूरी है?
सॉल्यूशन बनने के बाद कंसंट्रेशन जार से चेक करते हैं।
जार में मिक्सचर डालो, थोड़ी देर रुको, फिर यूवी लाइट से देखो।
क्या दिखता है?
कंसंट्रेशन क्या करना है
0.2 से 0.5 के बीच ✅ सही है, इंस्पेक्शन रेडी
पाउडर कम दिखे ➕ थोड़ा मैग्नाफ्लक्स पाउडर बढ़ाओ
पाउडर ज्यादा हो ➖ केरोसिन ऑयल डालो
नोट: कंसंट्रेशन गलत हुआ तो क्रैक दिखेगा नहीं – ये मैंने खुद देखा है।
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मशीन सेटअप कैसे करते हैं?
1. मशीन ऑन करो। (हमारी मशीन एसी, डीसी और एचडब्ल्यूडीसी करंट पे काम करती थी – बहुत सॉलिड मशीन थी)
2. पंप ऑन करो – अब ऑयल और पाउडर का मिक्सचर सर्कुलेट होने लगेगा।
3. जिस पार्ट का इंस्पेक्शन करना है, उसे मशीन में क्लैंप करो।
4. अगर शाफ्ट या रॉड टाइप पार्ट है, तो अलाइनमेंट सही से करो।
5. अब पार्ट पे मैग्नाफ्लक्स सॉल्यूशन अच्छे से फ्लो कराओ।
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करंट पास क्यू करते हैं?
पार्ट सेट होने के बाद फुट पेडल से करंट पास करते हैं।
आम तौर पर दो बार करंट पास करते हैं – ताकि मैग्नेटिक फील्ड ठीक से जनरेट हो।
ये मैग्नेटिक फील्ड ही क्रैक डिटेक्शन की रियल हीरो है।
सिंपल है – अगर पार्ट में क्रैक है, तो मैग्नेटिक पार्टिकल्स वहाँ जमने लगते हैं।
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क्रैक कैसे दिखता है? (ये सबसे इंपॉर्टेंट पार्ट है)
करंट पास करने के बाद पार्ट को बिल्कुल हाथ मत लगाओ – हाथ लगाओगे तो पाउडर हट जाएगा और इंडिकेशन खराब हो जाएगी। ये मैंने अपनी गलतियों से सीखा है।
अब यूवी लाइट से इंस्पेक्शन करो।
क्रैक है तो क्या होगा?
· वहाँ पाउडर जम के दिखेगा
· लाइन जैसी इंडिकेशन बनेगी
· कभी सर्कुलर भी दिखती है
यही है क्रैक इंडिकेशन – यहीं से डिफेक्ट आइडेंटिफाई होता है।
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क्रैक कितने टाइप के होते हैं?
मैं दो टाइप देखे हैं प्रैक्टिकली:
1. स्ट्रेट क्रैक
सीधी लाइन जैसा दिखता है।
2. सर्कुलर क्रैक
गोल शेप में दिखता है।
यूवी लाइट के नीचे क्रैक क्लियरली दिख जाता है – ट्रस्ट मी, पहली बार देखना एक अलग फील देता है।
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रिजेक्शन प्रोसेस – क्या करते हैं?
क्रैक मिलने पर कैसे रिजेक्ट करते हैं? ये टेबल याद रखो:
स्टेटस कलर मार्क एक्शन
🔴 क्रैक कन्फर्म लाल रिजेक्ट – प्रोडक्शन में आगे नहीं भेजना
🟡 डाउट है पीला होल्ड एरिया में रखो + सुपरवाइजर को बताओ
🟢 बिल्कुल सही हरा नेक्स्ट प्रोसेस भेजो
मैं खुद लाल मार्क करता था और वो पार्ट वापस नहीं आता था।
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डीमैग्नेटाइजेशन – क्यू जरूरी है?
एमपीआई के बाद पार्ट मैग्नेटाइज्ड हो जाता है। अगर डीमैग्नेटाइज नहीं करोगे तो:
· छोटे मेटल पार्टिकल्स पार्ट पे चिपक जाएंगे
· मशीनिंग में प्रॉब्लम आएगी
· असेंबली और मेज़रमेंट में भी इश्यू होगा
इसलिए इंस्पेक्शन के बाद पार्ट को डीमैग्नेटाइज करना बिल्कुल जरूरी है।
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ऑटो इंडस्ट्री में एमपीआई क्यू इंपॉर्टेंट है?
सेफ्टी के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है।
अगर गियर या शाफ्ट में क्रैक रह गया और वो पार्ट कार में चला गया – तो फ्यूचर में वो क्रैक बढ़ सकता है और मेजर फेलियर हो सकती है।
इसलिए एमपीआई:
· सेफ्टी इम्प्रूव करता है
· डिफेक्ट आइडेंटिफाई करता है
· कस्टमर कंप्लेंट्स कम करता है
· क्वालिटी बना के रखता है
यही वजह है कि एमपीआई ऑटोमोटिव क्वालिटी सिस्टम का इंपॉर्टेंट पार्ट है।
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मेरा प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस (सीधा सच)
एमपीआई इंस्पेक्शन करना मेरे लिए एक डिफरेंट एक्सपीरियंस था।
सच बोलूँ तो शुरू में यूवी लाइट ऑब्जर्वेशन और क्रैक इंडिकेशन समझना ईज़ी नहीं था. पर धीरे-धीरे प्रैक्टिकल नॉलेज बढ़ती गई।
गियर और शाफ्ट इंस्पेक्शन में ऑब्जर्वेशन स्किल बहुत मैटर करती है – कभी कभी क्रैक इतना छोटा होता है कि मिस हो सकता है।
मेरी कंपनी में 1200 लोग थे लेकिन एमपीआई की प्रैक्टिकल नॉलेज सिर्फ कुछ लोगों को थी। मुझे क्रैक इंस्पेक्शन की रिस्पॉन्सिबिलिटी मिली – और इसी काम ने मुझे क्वालिटी इंस्पेक्शन की रियल प्रैक्टिकल अंडरस्टैंडिंग दी।
निष्कर्ष
एमपीआई यानी मैग्नेटिक पार्टिकल इंस्पेक्शन – एक इंपॉर्टेंट एनडीटी प्रोसेस है।
काम क्या है?
· मेटल पार्ट्स में क्रैक ढूंढना
· डिफेक्टिव पार्ट्स को प्रोडक्शन से बाहर करना
गियर, शाफ्ट और क्रिटिकल सेफ्टी कंपोनेंट्स की क्वालिटी एंश्योर करने में एमपीआई की बहुत इंपॉर्टेंट रोल है।
और हाँ – ये जो मैंने लिखा है सब प्रैक्टिकल है।
अगर आप क्वालिटी इंजीनियर हो या मैकेनिकल इंजीनियर, तो एमपीआई की प्रैक्टिकल अंडरस्टैंडिंग आपके करियर में काम आएगी। कोई भी ट्रेनिंग वीडियो उतना नहीं सिखाता जितना रियल रिजेक्शन के टाइम सीखते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Question 1 – क्या एमपीआई से इंटरनल क्रैक डिटेक्ट हो जाता है?
नहीं – एमपीआई सिर्फ सरफेस और नियर सरफेस क्रैक्स के लिए है।
Question 2 – अल्यूमिनियम पार्ट्स पे एमपीआई कर सकते हैं?
नहीं। एमपीआई सिर्फ फेरोमैग्नेटिक मटेरियल्स (जैसे आयरन, स्टील) पे काम करता है।
Question 3 – एमपीआई और डीपीटी में क्या फर्क है?
एमपीआई मैग्नेटिक पार्टिकल्स यूज़ करता है, डीपीटी डाई पेनेट्रेंट यूज़ करता है। एमपीआई ज्यादा सेंसिटिव है।
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