मेरा नाम प्रविंद शाह है। मैं मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के एक छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ। मेरी जिंदगी की शुरुआत एक साधारण परिवार से हुई, जहाँ सपने तो बड़े थे, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए साधन बहुत कम थे।
👶 शुरुआती जीवन और पढ़ाई
मैंने अपनी पढ़ाई पहली कक्षा से लेकर आठवीं तक अपने ही गाँव के स्कूल से पूरी की। उसके बाद नौवीं और दसवीं की पढ़ाई के लिए मुझे अपने गाँव से लगभग 6–7 किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ता था।
दसवीं के बाद मेरा मन था कि मैं 11वीं की पढ़ाई एक्सीलेंस स्कूल से करूँ, जो मेरे घर से लगभग 20–25 किलोमीटर दूर था। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि रोज आने-जाने का खर्च उठा सकें। इसलिए मुझे वहाँ एडमिशन छोड़ना पड़ा।
🎓 डिप्लोमा का फैसला
परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि हमें जल्दी नौकरी पाने के बारे में सोचना पड़ा। इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं डिप्लोमा करूँ। मैंने जबलपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।
डिप्लोमा के दौरान भी खर्च निकालना आसान नहीं था। मैं कभी-कभी ऑनलाइन काम करता था, जैसे किसी का फॉर्म भरना, जिससे थोड़े-बहुत पैसे आ जाते थे। इसी तरह जैसे-तैसे तीन साल पूरे किए।
💼 नौकरी की शुरुआत और संघर्ष
2023 में जैसे ही मेरा डिप्लोमा पूरा हुआ, मैंने नौकरी के बारे में सोचना शुरू कर दिया। सबसे पहले मेरा कैंपस सेलेक्शन CAT Tyre, वडोदरा (गुजरात) में हुआ, लेकिन मैंने वहाँ जॉइन नहीं किया क्योंकि मेरा वजन 50 किलो से कम था और वहाँ फिजिकल फिटनेस जरूरी थी।
उस समय मेरी उम्र सिर्फ 18 साल थी। जब बाकी लोग कॉलेज शुरू कर रहे होते हैं, तब मैं अपना डिप्लोमा पूरा कर चुका था और घर से दूर रहने की आदत भी डाल चुका था।
कम उम्र में घर से दूर रहना आसान नहीं होता। कई बार समय पर खाना नहीं मिल पाता था, और कभी आलस की वजह से खुद भी नहीं बनाते थे। कई बार तो सिर्फ पानी पीकर सो जाना पड़ता था। अगर घर पर होते, तो जिंदगी अलग होती।
🚧 नौकरी की तलाश और अनुभव
डिप्लोमा के बाद मैं पुणे गया और वहाँ Megna कंपनी में जॉब जॉइन की, लेकिन सिर्फ 2 महीने बाद ही मुझे वहाँ का माहौल सही नहीं लगा और मेरी तबीयत भी खराब हो गई, इसलिए मैं वापस गाँव आ गया।
गाँव आने के बाद एक बात समझ में आई—
जब तक आप पैसे नहीं कमाते, तब तक आपकी इज्जत कम ही होती है, चाहे घर ही क्यों न हो।
इसके बाद मैं देवास गया और वहाँ John Deere में जॉब जॉइन की, लेकिन वहाँ भी मन नहीं लगा और मैंने उसे छोड़ दिया।
🌟 टर्निंग पॉइंट
फिर मुझे देवास में ही VE Commercial Vehicles में काम करने का मौका मिला। यहाँ मैंने पूरे दिल से एक साल काम किया।
यह मेरी जिंदगी का एक बहुत अच्छा समय था। यहाँ का माहौल बहुत अच्छा था, लोगों से सम्मान मिला और हर रविवार घूमने-फिरने का मौका मिलता था। सबसे खास बात थी माँ चामुंडा देवी मंदिर, जहाँ जाने से मुझे बहुत शांति और सुकून मिलता था। आज भी वहाँ की याद आती है।
🔄 आगे की यात्रा
एक साल का अनुभव लेने के बाद मैंने नई नौकरी की तलाश शुरू की और गुजरात में Banco Product जॉइन किया। लेकिन वहाँ की तेज गर्मी और माहौल मुझे सहन नहीं हुआ, इसलिए मैं वापस आ गया।
फिर मैं पीथमपुर गया, जहाँ एक हफ्ते तक भटकने के बाद मुझे फिर से VE Commercial Vehicles में जॉब मिली। इस बार मुझे Quality Supervisor का रोल मिला।
मैंने यहाँ 6 महीने पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम किया। इसके बाद कुछ व्यक्तिगत कारणों से मैंने नौकरी बदली और Mahindra Two Wheelers में जॉइन किया।
💼 Mahindra Two Wheelers का अनुभव
मैंने Mahindra Two Wheelers में जॉइन किया, जहाँ मुझे SCM (Supply Chain Management) department में काम करने का मौका मिला। बाद में मुझे HR (IR & ER) department में shift किया गया।
यह experience मेरे लिए बहुत valuable रहा, क्योंकि मुझे real corporate life को समझने का मौका मिला। मुझे Pune में supplier visit के लिए भी भेजा गया, जो मेरी life का एक बहुत important experience रहा।
🧠 मेरी सोच और अकेलापन
मुझे अकेले रहना पसंद है। शायद इसलिए क्योंकि जिंदगी में मैंने बहुत कुछ अकेले ही सीखा और झेला है। अब मुझे किसी से ज्यादा मतलब नहीं होता—
मैं बस अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहता हूँ।
📚 जीवन से सीखी बातें
मेरी जिंदगी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है:
मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता
हालात चाहे जैसे हों, आगे बढ़ते रहना चाहिए
और सबसे जरूरी—खुद पर विश्वास रखना चाहिए
🔚 निष्कर्ष
यह मेरी अब तक की यात्रा है—एक छोटे से गाँव से शुरू होकर कई शहरों और संघर्षों से गुजरती हुई।
मेरी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, यह तो बस शुरुआत है। आगे और भी बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ पाना है।
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